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रोज़ के सरल नेत्र-अभ्यास

आँखों के लिए दिन भर की छोटी, नरम आदतें

फ़ोन, लैपटॉप, बारीक अक्षर और तेज़ धूप के बीच आँखें अक्सर बिना कहे थक जाती हैं। यहाँ हम पलक झपकाने, हथेलियों की ओट और दूर-पास देखने जैसे कुछ मिनट के आसान अभ्यास और रोज़ की आदतें शांत भाषा में समझाते हैं। ये आराम के छोटे पल हैं, नज़र बदलने का कोई तरीका नहीं।

शैक्षिक जानकारी। यह नेत्र विशेषज्ञ की जाँच या सलाह का विकल्प नहीं है।

धीरे से पलक झपकाएँ
Young man resting his eyes by gently covering them with both palms
कुछ पल दूर देखें
सच्ची उम्मीदें

दो कटोरे: क्या मिल सकता है, क्या नहीं

कुम्हार जानता है कि मिट्टी से क्या बन सकता है और क्या नहीं। आँखों की आदतों के साथ भी यही ईमानदारी ज़रूरी है।

इस कटोरे में है

  • लंबे स्क्रीन-काम के बीच आँखों को कुछ पल का आराम
  • पलक झपकाने की याद, जो एकटक देखने में अक्सर कम हो जाती है
  • पढ़ने और काम करने की जगह को आँखों के लिए ज़्यादा सहज बनाना
  • अपनी आँखों के संकेतों पर ध्यान देने की आदत
  • समय पर जाँच कराने की याद, ताकि बदलाव छूट न जाएँ

यह कटोरा खाली रहता है

  • चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का नंबर कम करना
  • मायोपिया, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा या किसी नेत्र रोग का इलाज
  • डॉक्टर की बताई दवा, ड्रॉप या चश्मे की जगह लेना
  • हर व्यक्ति पर एक जैसा असर या तय परिणाम
  • आँख की जाँच को टाल देने का कारण बनना

साधारण थकान कैसी लगती है

लंबे समय तक स्क्रीन या किताब देखने के बाद आँखों में हल्का भारीपन, थोड़ी सूखापन-सी जलन या ध्यान टिकाने में आलस। आराम, पलकों और दूर देखने के बाद यह आमतौर पर कम हो जाता है।

जब बात थकान से आगे की हो

नज़र का बार-बार धुंधला होना, दर्द, लालिमा, रोशनी के चारों ओर घेरे या ऐसी परेशानी जो आराम के बाद भी न जाए: यह अभ्यास का नहीं, नेत्र विशेषज्ञ से मिलने का समय है। संकेतों की पूरी सूची हर उम्र की आँखें वाले पन्ने पर है।

एक आम भारतीय दिन

दिन की परतें: आँखें कहाँ थकती हैं

मिट्टी की परतों की तरह हमारा दिन भी तह-दर-तह बनता है। हर परत में आँखों पर थोड़ा अलग बोझ पड़ता है, और हर परत में एक छोटा-सा विराम भी छिपा होता है।

  1. सुबह

    आँख खुलते ही फ़ोन पर संदेश और ख़बरें, अक्सर कम रोशनी में और चेहरे के बहुत पास।

    पहले खिड़की खोलकर कुछ पल दूर देखें, फिर फ़ोन उठाएँ।

  2. सफ़र

    ऑटो, बस या मेट्रो में हिलती स्क्रीन पर वीडियो, साथ में धूल और तेज़ धूप।

    स्क्रीन जेब में रखें, बाहर के दूर वाले दृश्य पर नज़र टिकाएँ, धूप में धूप का चश्मा।

  3. काम या पढ़ाई

    घंटों तक लैपटॉप या किताब, एकटक देखना और कूलर या एसी की सूखी हवा।

    हर कुछ देर में 20-20-20 की याद और सचेत पलकें।

  4. शाम

    बारीक अक्षरों वाले बिल, सब्ज़ी का हिसाब, फिर टीवी और फ़ोन एक साथ।

    पढ़ने के लिए बगल से आती रोशनी और साफ़ चश्मा।

  5. रात

    अँधेरे कमरे में चमकती स्क्रीन पर देर तक स्क्रॉल करना।

    सोने से पहले स्क्रीन रखकर कुछ पल हथेलियों की ओट।

अभ्यासों की झलक

छह कंकड़, एक नरम रास्ता

नदी किनारे के चिकने कंकड़ों की तरह ये अभ्यास छोटे, गोल और हल्के हैं। इन्हें दिन भर में जहाँ जगह मिले, वहाँ रख दीजिए। किसी को ज़ोर लगाकर करने की ज़रूरत नहीं।

  1. 1

    सचेत पलकें

    कुछ बार धीरे, पूरी पलक बंद करके खोलना।

  2. 2

    20-20-20 की याद

    कुछ देर बाद दूर किसी चीज़ पर नज़र टिकाना।

  3. 3

    हथेलियों की ओट

    गरम हथेलियों से आँखें ढककर अँधेरे में आराम।

  4. 4

    दूर-पास

    पास की उंगली और दूर के पेड़ के बीच नज़र बदलना।

  5. 5

    धीमी नज़र-यात्रा

    ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, बिना खिंचाव के।

  6. 6

    खुली रोशनी

    बाहर या खिड़की पर कुछ पल प्राकृतिक रोशनी।

हर अभ्यास का तरीका पढ़ें

हर अभ्यास के साथ लिखा है कि कब रुकना है और वह क्या नहीं करता।

सहज कोना

पढ़ने और स्क्रीन का कोना, ग्लेज़ की टाइलों की तरह

कुम्हार भट्ठी में डालने से पहले छोटी टाइलों पर रंग आज़माता है। आप भी अपनी जगह पर ये छोटे बदलाव एक-एक करके आज़माइए और देखिए कि आपकी आँखों को क्या सहज लगता है।

Man at an office desk adjusting his glasses next to a laptop and a bright window
  • रोशनी बगल से

    खिड़की या लैंप की रोशनी स्क्रीन के पीछे या सीधे आँखों में नहीं, बगल से आए तो चमक कम चुभती है।

  • हाथ भर की दूरी

    लैपटॉप या मॉनिटर लगभग एक हाथ की दूरी पर हो; फ़ोन को चेहरे से सटाकर न पढ़ें।

  • ऊपरी किनारा नज़र के बराबर

    स्क्रीन का ऊपरी किनारा आँखों के आसपास या थोड़ा नीचे हो, ताकि नज़र हल्की-सी नीचे झुके।

  • अक्षर बड़े, चमक संतुलित

    फ़ॉन्ट का आकार बढ़ाने में संकोच न करें; स्क्रीन की चमक कमरे की रोशनी जैसी रखें।

  • हवा का रुख़

    कूलर, पंखे या एसी की हवा सीधे चेहरे पर न पड़े; सूखी हवा में आँखें जल्दी थकती महसूस होती हैं।

  • साफ़ चश्मा

    अगर आपको चश्मा दिया गया है तो उसे पहनें और मुलायम कपड़े से साफ़ रखें; धुंधले शीशे भी थकान बढ़ाते हैं।

Eye care professional examining a patient's eyes with a slit lamp in a bright clinic room

अभ्यास आराम देते हैं, जाँच बताती है। दोनों की जगह अलग है।

जाँच भी आदत है

आँखों की जाँच को दिनचर्या का हिस्सा बनाइए

कई बदलाव धीरे-धीरे आते हैं और शुरुआत में कोई तकलीफ़ नहीं देते। इसलिए सलाह दी जाती है कि नज़र ठीक लगे तब भी समय-समय पर आँखों की जाँच कराई जाए। कितने अंतराल पर, यह उम्र, चश्मे, डायबिटीज़ या परिवार में आँखों की बीमारी जैसी बातों पर निर्भर करता है, और यह फ़ैसला नेत्र विशेषज्ञ ही बेहतर कर सकते हैं।

बच्चों की पढ़ाई, दफ़्तर का लंबा दिन और बढ़ती उम्र के लिए जाँच का महत्व कैसे बदलता है, और किन संकेतों पर तुरंत मदद लेनी चाहिए, यह हमने अलग से लिखा है।

उम्र के हिसाब से आदतें और संकेत
आपकी बात

कोई अभ्यास समझ नहीं आया?

कोई कदम अधूरा लगे या किसी नए विषय पर पढ़ना हो, तो हमें लिखिए। हम निजी जाँच या इलाज की सलाह नहीं देते, पर लेखों को साफ़ बनाने में आपकी बात काम आती है।